रायपुर। Hanuman Jayanti 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मंदिरों में आज हनुमान जयंती धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। सुबह 5 बजे से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। राजधानी के पूरे हनुमान मंदिर में जय श्रीराम की जयघोष से गूंज रहे हैं। रायपुर के महादेवघाट स्थित हनुमान मंदिर में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। शाम को रामायण मंडलियों ने सुंदरकांड का पाठ हुआ। ढोल नगाड़े के बीच सभी संकटमोचन की भक्ति में डूबे रहे।

जानें इस मंदिर की खासियत
मंदिर के मुख्य पुजारी का कहना है कि मंदिर के पीछे मुक्तिधाम है। जहां गोस्वामी समाज सहित कई समाज के लोगों के अपने पूर्वजों की मत्यु के बाद यहां पर दफना देते हैं। ऐसा माना जाता था जब मंदिर बना तब यहां भूत-प्रेत से लोग डरते थे। रात में आने से डरते थे। यहां तक कि जब मंदिर बन रहा था और मंदिर के बनने के बाद भी कुछ महिनों तक भूत-प्रेत का साया नजर आता था। मंदिर के बाउंड्रीवाल तक ऐसे संकेत दिखते थे। इससे मंदिर के पुजारी समेत भक्तगण डर जाते थे। बाद में पुजारी ने जय यहां पर नियमित रूप में सुबह-शाम पूजा पाठ करने लगे तो बजरंग बली की महिमा के आगे ऐसे भूत-प्रेतों की एक न चली। जैसा कि हनुमान चालीसा में जिक्र है….’भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे।” अब हर मंगलवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मुरादें मांगी जाये तो बजरंग बली उनकी फरियाद पूरी करते हैं।

बिड़ला मंदिर की तर्ज पर बना है ये मंदिर
बिड़ला मंदिर की तर्ज पर बने इस भव्य मंदिर मंदिर के ट्रस्टी बीजेपी नेता और पूर्व विधानसभा स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल हैं। मंदिर का निर्माण वर्ष 2007 में संगमरमर से किया गया है और इसकी प्राण प्रतिष्ठा साल 2012 में की गई थी। लगभग एक एकड़ जमीन में बने हनुमान मंदिर में सत्संग भवन और उद्यान और 19 दुकानें हैं। मंदिर की कुल ऊंचाई जमीन से गुंबद के कलश तक 53 फुट 5 इंच है। लंबाई 101 फुट 9 इंच एवं चौड़ाई 67 फुट 5 इंच है। सभा मंडप में मकराना (राजस्थान) के कुमारी संगमरमर का और गुंबद में भागंदरराज (गुजरात) के सैंड स्टोन का इस्तेमाल किया गया है।

कही भी लोहे का इस्तेमाल नहीं
सबसे बड़ी और खास बात ये है कि इस मंदिर निर्माण में कही भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मंदिर में 61 इंच की हनुमान की प्रतिमा स्थापित है। यहां प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की प्रतिमाएं बेहद सुंदर स्वरूप में विराजमान हैं। मंदिर में पांच गर्भगृह का निर्माण कराया गया है। मंदिर में एक सुंदर और अनुपम उद्यान है, जो लोगों को काफी आकर्षित करता है। इस मंदिर का निर्माण छगनलाल गोविंदराम अग्रवाल ट्रस्ट ने कराया है। वहीं इस ट्रस्ट को श्याम सुंदर अग्रवाल और गौरीशंकर अग्रवाल चलाते हैं। फिलहाल मंदिर को राजसात कर लिया गया है और ये मंदिर नगर निगम रायपुर के कब्जे में है। हालांकि संस्था का कहना है कि आधिपत्य भले ही नगर निगम को मिला है, लेकिन इसके संचालक और पुजारी एक ही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पहुंचे थे बुलडोजर पर आस्था के आगे एक न चली
11 साल पहले हमर संगवारी संस्था ने मंदिर के ट्रस्टी विधानसभा स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके मंदिर का निर्माण कराने का आरोप लगाया था। संस्था ने तत्कालीन राजस्व सचिव को पत्र लिखकर मंदिर परिसर के अवैध कब्जे को गिराने और मूल स्वरूप में लौटाने की मांग की थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2010 में सभी प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया था कि सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जे को खत्म करके मूल स्वरूप में लाया जाये। उस दौरान बीजेपी के रमन राज में मंदिर परिसर के अवैध कब्जे को तोड़कर मूल स्वरूप में लाने की मांग की गई थी।

मंदिर को बचाने सड़क पर उतरे थे साधु-संत और समाजिक संगठन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर को गिराने के लिए बुलडोजर भी मौके पर पहुंच गये थे। उस दौरान देश-प्रदेश के साधु-संतों और समाजिक संगठनों ने एकजुट होकर कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर गये थे। रातभर मंदिर परिसर में ही साधु-संत डेरा जमाये रहे। परिणामस्वरूप विरोध की वजह से ढाहे गये मलबे को नहीं हटाया था। इस दौरान करीब 19 दुकानों की छतों और दीवारों को बुलडोजर से गिराया गया था।