vijay sharmaगृहमंत्री विजय शर्मा

रायपुर। राज्य सरकार, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह से मुक्त हो जाएगा। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ के सामाजिक, आर्थिक और मानवीय पुनर्जागरण की दिशा में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। इसरो, एनटीआरओ, आईटीबीपी और एनएसजी जैसी संस्थाओं की तकनीकी सहयोग ने नक्सल अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया। ये बातें आज बुधवार को जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहीं।

उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित समय-सीमा के अनुरूप राज्य सरकार ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत कार्य किया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। इसी क्रम में हाल ही में डीकेजेडसी स्तर के नक्सली पापा राव ने अपने साथियों एवं हथियारों सहित पुनर्वास कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह घटना न केवल सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि अब नक्सल संगठन का शीर्ष ढांचा भी कमजोर पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि बस्तर के समाज ने भी खुले मन से इन पुनर्वासित लोगों को स्वीकार कर सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि पिछले दो वर्षों में लगभग 3 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास किया है, जिसमें सीसी मेंबर से लेकर विभिन्न स्तरों के कैडर शामिल हैं। इसके अलावा 2 हजार से अधिक नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है और लगभग 500 से अधिक नक्सली मुठभेड़ों में निष्प्रभावी (न्यूट्रलाइज) किए गए हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 5000 से अधिक सशस्त्र कैडर में कमी आई है, जो नक्सल संगठन की रीढ़ को कमजोर करने वाला निर्णायक कारक सिद्ध हुआ है। वर्तमान स्थिति में डीकेजेडसी स्तर का कोई सक्रिय माओवादी छत्तीसगढ़ में शेष नहीं है और केवल 30 से 40 की सीमित संख्या में नक्सली उत्तर एवं दक्षिण के दूरस्थ क्षेत्रों में बचे हैं, जिनके भी शीघ्र पुनर्वास करने की संभावना है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग सहित कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जैसे जिले, जो कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे थे, अब पूरी तरह इस समस्या से मुक्त हो चुके हैं। बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के अद्वितीय साहस, रणनीतिक दक्षता और कठिन परिस्थितियों में निरंतर किए गए प्रयासों का परिणाम है। केंद्रीय और राज्य के सुरक्षा बलों के जवानों ने विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया है, जिसके लिए पूरा प्रदेश उनका ऋणी है।

उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर के पत्रकार साथियों के प्रयास, पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका तथा बस्तर के स्थानीय मुरिया, मारिया, गोंड और हलबा समाज के प्रमुखों का सहयोग इस अभियान की सफलता के प्रमुख आधार रहे हैं। इसके साथ ही पत्रकारों ने भी जनजागरण, संवाद और विश्वास निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों के कारण बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा को अपनाया, जिससे अनेक जिंदगियां बच सकीं और बस्तर को भय और रक्तपात के वातावरण से बाहर निकालने में सफलता मिली। बस्तर के आंतरिक क्षेत्रों में स्थापित लगभग 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा। भविष्य में ये कैंप थाना, स्कूल, अस्पताल तथा लघु वनोपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे तथा क्षेत्र में स्थायी विकास की आधारशिला मजबूत होगी।

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