जगदलपुर। कुख्यात नक्सली पापााराव ने अपने 17 साथियों के साथ आज बुधवार को बस्तर में सरेंडर कर दिया। उसने नक्सलियों की खोखली विचारधारा से त्रस्त होकर अपने 17 नक्सली साथियों के साथ बुधवार को बस्तर संभाग के आईजी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के अहम सदस्य पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ प्रदेश के डीजीपी, एडीजी नक्सल, बस्तर आईजी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया।
पुलिस को सरेंडर करने के साथ ही भारी मात्रा में हथियार भी सुपूर्द किया गया। इनमें 8 एके-47, एक इंसास राइफल, चार थ्री-नॉट-थ्री, एक एसएलआर, दो सिंगल शॉट और बीजीएल लॉन्चर के साथ ही 12 लाख रुपए नगद भी पुलिस के हवाले किया गया।
11 पुरुष और सात महिला नक्सली समेत कुल 18 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में डीकेएसजेडसी मेंबर पापाराव समेत डीवीसीएम और एसीएम रैंक के नक्सली शामिल हैं। मंगलवार को नक्सली कई किलोमीटर पैदल चलकर जंगल के रास्ते बीजापुर पहुंचे। फिर बस से नक्सलियों को जगदलपुर लाया गया, जहां पर आज सरेंडर करवाया गया।
बताया जाता है कि पापा राव एके-47 समेत कई आधुनिक हथियारों से लैस रहता है। वह वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का सदस्य है। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि नक्सली पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म होगा। अब छत्तीसगढ़ में बड़े कैडर का एक भी नक्सली नहीं बचा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में अब 96 प्रतिशत नक्सलवाद खत्म हो चुका है। पिछले दो वर्षों में करीब तीन हजार नक्सलियों का पुनर्वास, दो हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां और 500 से ज्यादा नक्सली मुठभेड़ में मारे गये हैं। कुल
मिलाकर पांच हजार से ज्यादा नक्सलियों की ताकत को कमजोर किया गया है। प्रदेश के बस्तर संभाग, कवर्धा, मानपुर-मोहला और धमतरी जैसे नक्सल प्रभावित इलाके नक्सल मुक्त हो रहे हैं। सरकार 31 मार्च तक बचे हुए चार से पांच प्रतिशत नक्सलियों के सफाया करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है।
पापा राव के सरेंडर या ढेर होने से पश्चिम बस्तर डिवीजन में नक्सलवाद की पूरी संरचना ताश के पत्ते की तरह बिखरकर टूट जायेगी। बस्तर में अब सिर्फ 100-125 नक्सली बचे हैं। हालांकि कोई बड़ा नक्सली कमांडर नहीं बचा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार के नक्सल अभियान की सबसे बड़ी सफलता मानी जायेगी। बता दें कि अब तक 500 से ज्यादा नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।
हालांकि बस्तर संभाग में जंगलों और सड़कों के किनारे बिछे आईईडी और बारूदी सुरंगें अब भी जवानों के लिए खतरा बनी हुई हैं, इन्हें लगातार बरामद किया जा रहा है। गृहमंत्री ने साफ कहा है कि जिस तरह गांव-गांव को ओडीएफ घोषित किया गया, उसी तरह अब हर गांव को ‘आईईडी फ्री’ बनाया जाएगा। पांच दशकों का दर्द अब खत्म होने की कगार पर है। पापा राव का सरेंडर एक संकेत है कि बस्तर बदल रहा है। जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब विकास और विश्वास की आवाज सुनाई दे रही है और यही बस्तर की नई पहचान बनेगी।


