Kukur Temple in Balodचैत्र नवरात्रि पर इस शहर में होती है कुत्ते की पूजा

बालोद। Chaitra Navratri 2025: पूरे देश में मां शक्ति के आराधना के पर्व नवरात्रि की धूम मची हुई है। हर तरफ ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं। मां शक्ति की इस आराधना के पर्व में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक ऐसा स्थल भी ह, जहां पर कुत्ते की पूजा की जाती है। हां इस मंदिर का नाम है कुकुरदेव। मान्यता फनी राजवंशी राजाओं के जमाने की है और इस कुकुरदेव मंदिर में आस्था के ज्योत भी जलाए गए हैं। दरअसल इस मंदिर में कुत्ते के स्वरूप में उसे ईमानदारी की पूजा होती है जो प्राचीन समय में इस कुत्ते ने निभाई थी।। ये मंदिर उसके दफन स्थल पर बना हुआ है।

कई प्राचीन देवी देवताओं का मंदिर समूह भी यहां स्थापित हैं। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। दरअसल, कुकुर देव मंदिर एक स्मारक है। एक वफादार कुत्ते की याद में इसे बनाया गया था और लोग आज इसकी पूजा करते हैं पूजा एक कुत्ते के रूप में उसे ईमानदारी और स्वामी भक्ति की होती है, जो प्राचीन कहानियां में दर्ज है इस मंदिर में आस्था के 95 ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं। शिव महापुराण की यहां पर गाथा सुनाई जा रही है। कुत्ते के इस स्मारक के आसपास देवी देवताओं की मूर्तियां इसलिए स्थापित की गई। क्योंकि एक कुत्ते की पूजा कौन करेगा और आज यह मंदिर पूरे देश भर में आस्था की एक अनूठी मिसाल के रूप में जाना जाता है।

ग्रामीण बताते हैं कि यहां पर कुत्ता काटने से जो बीमारी फैलती है, उसका इलाज होता है दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं और कुत्ते की वफादारी को सलाम करते हैं। कुकुरदेव भगवान के साथ यहां पर कई सारे देवी देवताओं के मंदिर समूह स्थापित है। पूरे छत्तीसगढ़ सहित देशभर के लोग यहां पर दीपक जलते हैं। दोनों नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर यहां पर विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

रोचक है कहानी

पुरातत्व विभाग के कर्मचारी महेश राम साहू ने बताया कि सदियों पहले एक बंजारा अपने परिवार के साथ इस गांव में आया था। उसके साथ एक कुत्ता भी था। गांव में एक बार अकाल पड़ गया तो बंजारे ने गांव के साहूकार से कर्ज लिया, लेकिन वो कर्ज वो वापस नहीं कर पाया। ऐसे में उसने अपना वफादार कुत्ता साहूकार के पास गिरवी रख दिया। कहते हैं कि एक बार साहूकार के यहां चोरी हो गई। चोरों ने सारा माल जमीन के नीचे गाड़ दिया और सोचा कि बाद में उसे निकाल लेंगे, लेकिन कुत्ते को उस लूटे हुए माल के बारे में पता चल गया और वो साहूकार को वहां तक ले गया। कुत्ते की बताई जगह पर साहूकार ने गड्ढा खोदा तो उसे अपना सारा माल मिल गया कुत्ते की वफादारी से खुश होकर साहूकार ने उसे आजाद कर देने का फैसला लिया।

तो बनवा दिया स्मारक
साहूकार ने उसने बंजारे के नाम एक चिट्ठी लिखी और कुत्ते के गले में लटकाकार उसे उसके मालिक के पास भेज दिया। इधर कुत्ता जैसे ही बंजारे के पास पहुंचा, उसे लगा कि वो साहूकार के पास से भागकर आया है। इसलिए उसने गुस्से में आकर कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला। हालांकि बाद में बंजारे ने कुत्ते के गले में लटकी साहूकार की चिट्ठी पढ़ी तो वो हैरान हो गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। उसके बाद उसने उसी जगह कुत्ते को दफना दिया और उस पर स्मारक बनवा दिया। स्मारक को बाद में लोगों ने मंदिर का रूप दे दिया, जिसे आज लोग कुकुर मंदिर के नाम से जानते हैं।

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