रायपुर। Hatkeshwarnath Mahadev: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के महादेवघाट स्थित हाटकेश्वरनाथ मंदिर की महिमा निराली है। जिसे सुनकर आप भी दंग रह जायेंगे और सोचने पर मजबूर हो जायेंगे। यहां कई पुरानी किवदंतियां लोगों को आश्चर्यचकित कर देती हैं। मंदिर की एतिहासिक महत्ता को जानकर हर कोई दंग रह जाता है।
फेमस है हाटकेश्वरनाथ महादेव की आरती, उमड़ती है भारी भीड़
यहां के शिव मंदिर में हर सोमवार को शिव आरती को देखने के लिये भारी भीड़ उमड़ती है। यहां की आरती काफी फेमस है जो, विशालकाय डमरू, ढोल नगाड़े , शंख समेत कई पुरातनी वाद्ययंत्रों से की जाती है। इसमें भारी संख्या में शिवभक्त उमड़ते हैं। भगवान हाटकेश्वरनाथ महादेव की मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
लक्ष्मण झूला और खारून नदी में नाव की सवारी आकर्षण का केंद्र
Hatkeshwarnath Mahadev: हरिद्वार के लक्ष्मण झूला की तर्ज पर यहां बने लक्ष्मण झूला और खारून नदी में नाव की सवारी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पास में बने गॉर्डन यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। रायपुर सहित अन्य जिलों के सैलानी यहां बड़ी संख्या पहुंचकर इसका आनंद लेते हैं। शहर की जीवनदायिनी नदी ‘खारुन’ तट पर स्थित ऐतिहासिक हटकेश्वरनाथ मंदिर का विशेष महत्व है।
कल्चुरी राजाओं ने बनवाया था मंदिर
Hatkeshwarnath Mahadev: 1402 ई में कल्चुरी वंश के राजा रामचंद्र के पुत्र ब्रह्मदेव राय के शासन काल में हाजीराज नाइक ने मंदिर का निर्माण करवाया था। ऐसी मान्यता है कि यहां नंदी महाराज के कानों में जो भक्त फरियाद या मन्नत मांगते हैं, उसकी भगवान शिव मुरादें जरूर पूरी करते हैं। सावन के महीने में यहां रायपुर और प्रदेश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ के कई जिलों से श्रद्धालु कांवर लेकर पहुंचते हैं। हर साल कांवर पदयात्रा भी निकाली जाती है।
जानें धार्मिक महत्ता
धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, जहां भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई के लिए रामेश्वरम में समुंद्र पर पुल बनाने की योजना बनाई तो उस समय बजरंग बली को शिवलिंग लाने के लिए कहा गया था। इस पर बजरंग बली शिवलिंग लाने गए। इस दौरान शिवलिंग लाने में काफी देर हुई, तो भगवान राम ने रामेश्वरम में रेत से ही विधि-विधान से पूजा अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना कर दी थी। बजरंग बली को किसी नदी के किनारे उस शिवलिंग को रखने के लिए कहा गया। कहा जाता है कि भगवान हनुमान ने रायपुर में खारून नदी के तट पर शिवलिंग रखकर चले गए, जो कालांतर में हटकेश्वर नाथ, महादेव घाट के नाम से विख्यात हुआ।


